Exit Poll: क्या दिल्ली में मनोज तिवारी को CM चेहरा घोषित न करना BJP की भूल थी?


Delhi assembly election 2020 exit poll अगर मनोज तिवारी बीजेपी के सीएम कैंडिडेट होते तो उन्हें और भी पूर्वांचलियों को वोट हासिल हो सकता था और AAP को जाने वाला 55 फीसदी वोट मनोज तिवारी की ओर खिसक सकता था. क्योंकि मनोज तिवारी पूर्वांचल समुदाय के लोकप्रिय, चर्चित और प्रभाव रखने वाले नेता-अभिनेता हैं.



  • M कैंडिडेट होते मनोज तिवारी तो बढ़ता पूर्वांचलियों का समर्थन?

  • मनोज तिवारी केजरीवाल के बाद CM पद की दूसरी पसंद

  • बीजेपी ने मनोज तिवारी को नहीं बनाया सीएम कैंडिडेट


मात्र 8 महीने पहले लोकसभा चुनाव में विशाल जनादेश के साथ भारत की सत्ता में वापसी करने वाली बीजेपी दिल्ली चुनाव में कोई भी छाप छोड़ पाने में फेल दिख रही है. एग्जिट पोल के आंकड़े बीजेपी के अरमानों पर पानी फेरते दिख रहे हैं. देश के सबसे विश्वस्त एग्जिट पोल आजतक एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक दिल्ली में एक बार फिर से झाड़ू चल सकती है और केजरीवाल अपने पुराने रिकॉड को तोड़कर एक बार फिर से अजेय साबित हो सकते हैं.


आजतक एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक  अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP को 59-68 से सीटें मिल सकती हैं. जबकि तमाम धुआंधार प्रचार के बावजूद बीजेपी को मात्र 2 से 11 सीटें मिलती दिख रही है. कांग्रेस की हालत बेहद बुरी है और उसे एक बार फिर से दिल्ली में शून्य सीटें मिलती दिख रही है.


अध्यक्ष बने मनोज तिवारी, लेकिन सीएम कैंडिडेट नहीं


पुरबिया अध्यक्ष और पूर्वांचलियों के दम पर दिल्ली की सत्ता में वापसी का सपना देखने वाली बीजेपी को करारा झटका लगा है. पूर्वांचल समुदाय के जाने-माने चेहरे मनोज तिवारी को चार साल पहले दिल्ली की कमान देकर बीजेपी ये सोचा था कि राज्य में बिहारी और यूपी के वोटरों से रिश्ता गांठेगी और उनका वोट लेगी. बीजेपी आलाकमान ने मनोज तिवारी को 2016 में दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष तो बना दिया, लेकिन जब चुनाव का वक्त आया तो बीजेपी ने एक रणनीतिक फैसला करते हुए मनोज तिवारी को दिल्ली का सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया है.